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Thursday, 12 June 2025

मुर्दों से बात करना उसका पेशा था। लेकिन खुद उसकी मौत एक पहेली बन गई, गौरव तिवारी की मौत की कहानी।🧵

वैसे तो दुनिया में हमने बहुत से संगठन और खूफिया एजेंसियों के बारे में सुन रखा है,जो समय आने पर मुश्किल से मुश्किल कामों को अंजाम देते रहते हैं।और उन्हीं में से एक पैरानॉर्मल टीम का संगठन भी है, पैरानॉर्मल टीम के बारे में हम आपको बता दें कि यह एक ऐसा संगठन होता है, जो भूतों और रहस्यमई ऊर्जाओं तथा गतिविधियों की जांच पड़ताल करके कभी-कभी उनको नॉर्मल स्थिति में लाने का कार्य करते हैं, और उन्हीं में से एक गौरव तिवारी भी थे। जिनकी मौत आज भी एक रहस्य बनी हुई है, आज के दौर में बढ़ रही तेजी से टेक्नोलॉजी के बीच भारत का एक लड़का कुछ बड़ा करने के उद्देश्य से भारत से अमेरिका चला जाता है, और वहां जाकर मेहनत और अपने बल पर आगे बढ़ते हुए एन.एफ.ओ प्लेन का लोको पायलट बन जाता है। और अब इसके बाद उसके जीवन में हर पल खुशी के कट रहे थे। लेकिन वो कहते हैं ना।
"कि मुल्क बदल जाए। पर वतन तो वतन होता है।। भूतों से बात करने वाले गौरव के रहस्यमयी मौत की अनसुनी दास्तान! जिंदगी से ज्यादा वो मौत का साच जानना चाहता था. मौत के बाद की सच्चाई पता लगाना चाहता था. मुर्दों को ढूंढना उसका शौक था. मुर्दों से बात करना उसका शगल. अनजान और अदृश्य लोगों की पहेली बुझाना उसका पेशा, लेकिन अब खुद उसी की मौत एक पहेली बन गई जिंदगी से ज्यादा वो मौत का साच जानना चाहता था. मौत के बाद की सच्चाई पता लगाना चाहता था. मुर्दों को ढूंढना उसका शौक था. मुर्दों से बात करना उसका शगल. अनजान और अदृश्य लोगों की पहेली बुझाना उसका पेशा, लेकिन अब खुद उसी की मौत एक पहेली बन गई. अपनी महारत, खास मशीन और कैमरे की मदद से ये हमेशा अनजान और अदृश्य लोगों को ढूंढता नजर आता. उनसे बातें करता. उनकी बातें सुनता. जी हां, हम बात कर रहे हैं पैरानार्मल जांचकर्ता गौरव तिवारी की, जिसकी रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई. कभी किसी सुनसान हवेली में, कभी खंडहर में, कभी कब्रिस्तान में तो कभी किसी सुनसान बियाबान में. यहां तक कि मुर्दाघर के अंदर भी. मुर्दों के साथ लेट कर वो उनका सच जानता था. उनसे बातें किया करता था. पर अफसोस वही गौरव तिवारी अपनी ही मौत को पहेली बना गया. इस बार इस पहेली को सुलझाने की जिम्मेदारी खुद की बजाए दिल्ली पुलिस के जिम्मे छोड़ गया. 32 साल का नौजवान गौरव अमेरिका से प्रोफेशनल पायलट की ट्रेनिंग बीच में छोड़ कर हिंदुस्तान लौट आया. यहां आकर उसने इंडियन पैरानॉर्मल सोसायटी का गठन किया. देश और दुनिया के करीब छह हजार हॉन्टेड लोकेशन की जांच करने वाले गौरव की लाश सात जुलाई को दिल्ली के द्वारका इलाके में उसी के फ्लैट में पाई गई. वो अपने ही घर के बाथरूम में फर्श पर पड़ा था. उसके गले पर काले रंग के गहरे निशान मिले हैं. ये निशान कुछ-कुछ वैसे ही हैं जैसे अमूमन गले में फंदा कसने पर होता है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या गौरव ने खुदकुशी की? क्या उसका कत्ल किया गया? क्या उसका काम उसकी मौत की वजह बनी? क्या उसके अदृश्य मेहमान ही उसके दुश्मन बन बैठे? क्या निगेटिव सोच हावी हो गई थी? मौत के बाद उठे रहस्यमयी सवाल गौरव की जिंदगी जिन रहस्यों को तलाशने में बीती कुछ वैसे ही रहस्यमयी सवाल अब उसकी मौत के बाद भी उठ रहे हैं. उसको ना तो कोई माली तंगी थी और ना ही किसी तरह की परेशानी. हाल ही में शादी की और खुश भी था. कोई बीमारी भी नहीं थी. मौत से एक दिन पहले की आखिरी रात भी वो अपने काम पर लगा था. दिल्ली के एक और हॉन्टेड प्लेस की जांच कर रहा था. यहां तक कि मरने से बस मिनट भर पहले तक भी बिल्कुल ठीक था. अपने लैपटाप पर मेल चेक कर रहा था. इसके बाद वो अचानक उठ कर बाथरूम जाता है. गौरव ने बीवी को बताई थी ये बात कुछ देर बाद घर वालों को बाथरूम में कुछ गिरने की आवाज आती है. इसी के बाद जब गौरव के पिता और पत्नी बाथरूम में झांकते हैं तो वो फर्श पर बेसुध मिलता है. इसके बाद उसे अस्पताल ले जाया जाता है. लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी. गौरव की मौत के बाद पूछताछ के दौरान गौरव की बीवी ने पुलिस को एक अजीब बात बताई. उसने कहा कि उसने मरने से कुछ दिन पहले कहा था कि उसे कुछ निगेटिव ताकतें मरने के लिए मजबूर कर रही हैं. बीवी को तब लगा कि ज्यादा काम की वजह से वो डिप्रेशन में है. अनजान शक्तियों की खोज में था 6 जुलाई को गौरव पूरे दिन अपने घर पर ही था. शाम साढ़े सात बजे वो जनकपुरी के एक हॉन्टेड प्लेस की छानबीन के लिए घर से निकला. वह जिन अनजान शक्तियों की खोज करता था, उसके लिए अक्सर देर रात तक घर से बाहर रहना पड़ता था. उसकी तफ्तीश अमूमन रात को ही हुआ करती. जनकपुरी में अपनी तफ्तीश पूरी करने के बाद वह रात डेढ़ बजे घर लौटता है. रात को देर से आने पर मियां-बीवी में झगड़ा हुआ. गौरव और घर के बाकी लोग सो गए. घर पर गौरव और उसकी पत्नी के अलावा उसके माता-पिता भी साथ रहते थे. आखिर कैसे हुई गौरव की मौत सात जुलाई की सुबह उठने के बाद सभी नाश्ता करते हैं. गौरव अपने कंप्यूटर पर लग जाता है. वो ईमेल चेक कर रहा था. करीब 11 बजे उसकी लाश बाथरूम में मिलती है. शुरूआती जांच के बाद पुलिस यही मान रही है कि गौरव ने खुदकुशी की है. वह अपने काम को लेकर डिप्रेशन था. इसकी जानकारी जुटाई जानी अभी बाकी है. गौरव के घर वाले यह कह रहे हैं कि वह कभी खुदकुशी नहीं कर सकता था. क्योंकि उसके पास मरने की कोई वजह ही नहीं थी. पुलिस अपनी जांच कर रही है. गौरव के पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है. हुआ भी कुछ ऐसा ही उसे अपने देश भारत की बहुत याद आती थी। इस बीच वह देखता है, कि अमेरिका में एक संगठन हुआ करता था। जिसे आज के समय में हम पैरानॉर्मल टीम के नाम से जानते हैं। तो वह प्लेन की ड्यूटी के साथ-साथ उसकी पढ़ाई भी जारी रखता है, इसके बाद एक दिन ऐसा भी आता है कि वह पैरानॉर्मल टीम का एक्सपर्ट भी बन जाता है। जिसके बाद वह प्लेन पायलट की नौकरी को छोड़कर अपने देश भारत में वापसी करता है, और यहां आने के बाद लगभग 2010 के आस-पास भारत सरकार की सहमति के साथ भारत का पहला पैरानॉर्मल टीम का अनुसंधान केंद्र स्थापित करता है, जिसके बाद भारत की जितनी भी भूतिया जगह और प्लेश थे। उन सभी की जांच के निर्देश मिलने पर उन जगहों की अपनी टीम के साथ जांच भी करता है, जिनमें से एक बंगाल का बेगुनकोदर रेलवे स्टेशन भी था। जिसके बारे में कहा जाता है कि यह रेलवे स्टेशन एक लड़की के भूत की वजह से 42 साल तक बंद रहा जिसकी पैरानॉर्मल टीम द्वारा जांच के बाद। इसे मात्र दिन के उजाले में ही चालू रखने का आदेश दिया गया है। और शाम होते ही यहां से सभी लोग चले जाते हैं, इसी तरह गौरव तिवारी ने लगभग 100 से भी ज्यादा हॉन्टेड जगहों की जांच पड़ताल की और नेगेटिव एनर्जी भूत होने और न होने का सबूत भी दिया। लेकिन जब एक दिन वो वॉशरूम में नहा रहे थे। इस दौरान उनकी मौत हो जाती है, जो की एक रहस्यमई घटना थी। क्योंकि उनकी गर्दन पर एक अजीब तरह का निशान बन गया था। जिसके बारे में कहा जाता है, कि उनके पीछे एक आत्मा पड़ी हुई थी। जिसका जिक्र खुद उनकी पत्नी ने किया था।

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